नई दिल्ली। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Trade Deal 2026) से भारतीय बाजार में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। इस समझौते के तहत भारत ने अमेरिका से आयात होने वाले कई कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क (टैरिफ) को घटाकर शून्य करने का निर्णय लिया है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के हितों से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के अनुसार, ड्राय फ्रूट्स जैसे बादाम, अखरोट और पिस्ता पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसके अलावा ताजे अमेरिकी सेब, चेरी और बेरीज भी भारतीय बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध होंगे। प्रीमियम वाइन और स्पिरिट्स पर भी टैरिफ में बड़ी कटौती की गई है, जिससे इन उत्पादों के दाम घटने की उम्मीद है।
वहीं, किसानों और विपक्ष की आशंकाओं के बीच कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में भरोसा दिलाया कि भारत की ‘रेड लाइन्स’ से कोई समझौता नहीं हुआ है। डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों को इस डील से बाहर रखा गया है। साथ ही गेहूं, चावल और मक्का जैसे मुख्य अनाज पर कोई टैक्स छूट नहीं दी गई है। जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों के आयात पर लगी रोक भी जारी रहेगी।
समझौते के बदले अमेरिका ने भारतीय निर्यात, विशेषकर टेक्सटाइल और जेम्स एंड ज्वैलरी उत्पादों पर लगने वाले भारी शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इससे भारतीय निर्यातकों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार ने किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए समझौता किया है और साथ ही भारतीय निर्यात के लिए नए अवसर सुनिश्चित किए हैं।














