New Delhi | Liberal Media
नई दिल्ली।
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद वेनेजुएला एक बार फिर वैश्विक ताकतों के टकराव का अखाड़ा बनता दिख रहा है। बमों और धमकियों के बीच घिरे इस संकट पर भारत ने सख्त और स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि ताकत के बल पर थोपे गए फैसले किसी देश को स्थिर नहीं कर सकते।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दो टूक शब्दों में कहा कि वेनेजुएला के लोगों का भविष्य किसी विदेशी बमबारी या सैन्य दबाव से तय नहीं होना चाहिए। उन्होंने सभी पक्षों को चेताते हुए कहा कि संयम और संवाद ही एकमात्र रास्ता है, अन्यथा इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ेगा।
भारत ने साफ संकेत दिया है कि वह किसी भी एकतरफा सैन्य कार्रवाई के समर्थन में नहीं है। जयशंकर ने कहा कि भारत वेनेजुएला को एक ऐसे संप्रभु राष्ट्र के रूप में देखता है, जिसके साथ उसके ऐतिहासिक और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं, और इन संबंधों को युद्ध की आग में झोंकने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
कूटनीतिक हलकों में भारत के इस बयान को अमेरिकी दबाव के बीच एक संतुलित लेकिन सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह बयान उस समय आया है जब वेनेजुएला में जारी संकट न केवल लैटिन अमेरिका बल्कि वैश्विक ऊर्जा और भू-राजनीति को भी झकझोर रहा है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी सवाल किया है कि क्या सैन्य हस्तक्षेप ने अब तक किसी संकट को स्थायी समाधान दिया है?
नई दिल्ली का कहना है कि अगर सच में वेनेजुएला के लोगों की भलाई चाही जाती है, तो युद्ध नहीं, बातचीत का रास्ता अपनाना होगा।














