व्हाट्सएप से तमंचे तक: बलिया में युवाओं के गैंग ने बढ़ाई पुलिस की धड़कन

By Liberal Media

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पूर्वांचल में चर्चा का विषय बने बलिया के व्हाट्सएप ग्रुप गैंग, वर्चस्व की जंग में बह रहा खून

बलिया: महान ऋषियों, क्रांतिकारियों और विद्वानों की धरती बलिया इन दिनों एक नए और खतरनाक कारण से सुर्खियों में है। पूर्वांचल में अब यह जिला युवाओं के बढ़ते आपराधिक रसूख और व्हाट्सएप ग्रुप गैंग कल्चर के लिए जाना जाने लगा है। मोबाइल पर बनने वाले ये ग्रुप अब सड़कों पर हाथों में लाठी, चाकू और तमंचे लिए खुलेआम ताकत दिखा रहे हैं।
जनपद भर में दर्जनभर से अधिक व्हाट्सएप ग्रुप गैंग सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिनके बीच वर्चस्व की जंग अब खूनी संघर्ष में बदल चुकी है। हालात ऐसे हैं कि यह गैंग पुलिस प्रशासन के लिए गंभीर सिरदर्द बन गए हैं।
ताजा मामला बेल्थरारोड तहसील के उभांव थाना क्षेत्र का है, जहां कुख्यात व्हाट्सएप ग्रुप 221715 से जुड़े दो युवाओं की हत्या ने पूरे जनपद को झकझोर कर रख दिया।
13 दिसंबर को वर्चस्व की जंग में रोबिन सिंह ग्रुप ने राहुल यादव उर्फ आयुष को उसके घर के दरवाजे पर ही सीने में गोली मार दी। इलाज के दौरान वाराणसी में उसकी मौत हो गई।
यहीं नहीं, इससे पहले 25 नवंबर को राहुल के करीबी साथी समीर उर्फ मंटू पर भी जानलेवा हमला किया गया था, जिसकी 17 दिसंबर को लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो गई।
इन दो हत्याओं के बाद राजनीतिक हलकों में भी सरगर्मी तेज हो गई है और योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस के दावे पर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के मुताबिक 221715 जनपद में अकेला गैंग नहीं है।7777, महाकाल, फरसा, राइडर, शिकारी, चुरकी जैसे नामों से सोशल मीडिया पर दर्जनों ग्रुप सक्रिय हैं। इनमें सैकड़ों किशोर और युवा जुड़े हैं।
एक कॉल या मैसेज पर महज आधे घंटे में 15 से 20 युवक मौके पर पहुंच जाते हैं और बिना अंजाम की परवाह किए मारपीट, धमकी और तोड़फोड़ शुरू कर देते हैं।
इन गैंगों पर दुकानदारों से वसूली, दबंगई और छोटे विवादों को बड़े संघर्ष में बदलने के आरोप हैं। सफेदपोशों का संरक्षण और ऊंची राजनीतिक पहुंच इनका मनोबल और बढ़ा रही है।
शिकायतों की कमी और प्रभावशाली संरक्षण के चलते पुलिस पर कार्रवाई न करने के आरोप लग रहे हैं। नतीजा यह कि युवाओं में गैंगवार की होड़ तेज होती जा रही है और अपराध बेलगाम हो रहा है।
हालांकि पुलिस गैंगों का रिकॉर्ड खंगालने और सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई अभी भी सवालों के घेरे में है।
दोहरी हत्या के बाद बलिया एसपी ओमवीर सिंह के निर्देश पर जिले के विभिन्न थानों में संदिग्ध युवाओं और गैंगों की जांच शुरू कर दी गई है।
बलिया एएसपी (उत्तरी) दिनेश कुमार शुक्ल ने साफ शब्दों में कहा कि “पढ़ने-लिखने की उम्र में युवक चाकू और तमंचा चला रहे हैं। ऐसे मनबढ़ युवाओं को चिन्हित किया जा रहा है। गैंग के सदस्यों की सूची तैयार की जा रही है और अभिभावकों को भी जागरूक किया जाएगा।”
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या बलिया में पनप रहे इस व्हाट्सएप गैंग कल्चर पर समय रहते लगाम लगेगी, या फिर मोबाइल की दुनिया से निकले ये गैंग आने वाले दिनों में और खून बहाएंगे?
बलिया की पहचान एक बार फिर दांव पर है।

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