ढाका/बांग्लादेश।
पड़ोसी देश बांग्लादेश में एक बार फिर अल्पसंख्यक हिंदुओं पर जुल्म की तस्वीरें सामने आई हैं, जिसने तथाकथित मानवाधिकार और सेकुलरिज़्म के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। वायरल हुई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह उन्मादी भीड़ एक हिंदू व्यक्ति को बेरहमी से पीट रही है, जबकि आसपास खड़े लोग तमाशबीन बने रहे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पीड़ित को पहले घेरा गया, फिर लाठियों और घूंसों से हमला किया गया। पीड़ित रहम की गुहार लगाता रहा, लेकिन कट्टरपंथी भीड़ का दिल नहीं पसीजा। इस पूरी घटना में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नाकाम नजर आई। सवाल यह है कि ऐसी घटनाओं के दौरान प्रशासन कहां था?
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले कोई नई बात नहीं हैं। आए दिन मंदिरों में तोड़फोड़, घरों को निशाना बनाना और लोगों को पीटना अब एक भयावह “सामान्य” स्थिति बनती जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मानवाधिकार का ढोल पीटने वाले संगठन इन घटनाओं पर चुप्पी साध लेते हैं, जो उनकी चयनात्मक संवेदनशीलता को उजागर करता है।
भारत सहित विश्व समुदाय को अब केवल चिंता व्यक्त करने से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाने होंगे। सवाल सिर्फ एक व्यक्ति की पिटाई का नहीं है, सवाल उस सोच का है जो मजहब के नाम पर इंसानियत को कुचल रही है। अगर समय रहते इस उन्माद पर लगाम नहीं लगी, तो बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति और भयावह हो सकती है।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बर्बरता का नंगा नाच, भीड़ ने हिंदू व्यक्ति को पीट-पीटकर किया अधमरा
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