मॉस्को। रूस समेत पूर्वी यूरोप के कई देशों में उभर रहा विवाह संकट केवल सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर जनसांख्यिकीय चेतावनी है। हालात यह हैं कि लाखों महिलाओं के सामने विवाह का विकल्प सिमटता जा रहा है, क्योंकि योग्य पुरुष आबादी तेजी से घट रही है।
आंकड़े बताते हैं कि रूस में पहले से ही महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक थी, लेकिन यूक्रेन युद्ध ने इस खाई को और चौड़ा कर दिया। युद्ध में मारे गए या घायल हुए युवा पुरुषों की भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं दिखती। इसके साथ ही नशाखोरी, हृदय रोग और अस्वस्थ जीवनशैली ने पुरुषों की औसत आयु को महिलाओं से कई वर्ष कम कर दिया है।
यह संकट केवल विवाह तक सीमित नहीं है। जब विवाह कम होंगे, तो जन्मदर गिरेगी, जनसंख्या वृद्ध होगी और श्रमबल कमजोर पड़ेगा। सामाजिक ढांचे में अकेलेपन, मानसिक तनाव और पारिवारिक विघटन जैसी समस्याएं बढ़ेंगी। यही कारण है कि कई महिलाएं अब विवाह को जीवन की अनिवार्यता मानने के बजाय विकल्पों के तौर पर देख रही हैं।
विश्लेषकों के अनुसार यह स्थिति सरकारों के लिए चेतावनी है। केवल युद्ध जीतने या आर्थिक सुधार से समस्या हल नहीं होगी। जब तक पुरुषों के स्वास्थ्य, जीवन प्रत्याशा और सामाजिक जिम्मेदारियों पर गंभीर काम नहीं होगा, तब तक यह असंतुलन समाज की जड़ों को कमजोर करता रहेगा।
यह संकट बताता है कि बंदूकें जब बोलती हैं, तो उनकी गूंज पीढ़ियों तक सुनाई देती है , और उसका सबसे गहरा असर समाज के भविष्य पर पड़ता है।














