लखनऊ। की अध्यक्षता में लोकभवन में आयोजित यूपी कैबिनेट बैठक में कई बड़े और अहम फैसले लिए गए। प्रधानमंत्री के ‘मितव्ययिता’ आह्वान को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी खर्चों में कटौती, ईंधन बचत और प्रशासनिक सुधारों को लेकर नई नीति लागू करने का निर्णय लिया है।
सबसे बड़ा फैसला मुख्यमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के काफिलों में 50 प्रतिशत कटौती को लेकर हुआ। सरकार ने ईंधन बचत को प्राथमिकता देते हुए ‘नो व्हीकल डे’ को बढ़ावा देने तथा सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक परिवहन के उपयोग की अपील की है। साथ ही 50 प्रतिशत सरकारी बैठकों को वर्चुअल मोड में आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश सरकार ने ‘एक जिला-एक उत्पाद’ के बाद अब ‘एक जिला-एक व्यंजन’ योजना शुरू करने का ऐलान किया है। इस नई पहल का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के पारंपरिक खान-पान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान के तहत वेलनेस और इको-टूरिज्म पर विशेष फोकस किया जाएगा।
कैबिनेट बैठक में ‘नवयुग पालिका योजना’ को भी मंजूरी दी गई, जिसके तहत नगर पालिकाओं को स्मार्ट सिटी मॉडल पर विकसित किया जाएगा। शहरों में डिजिटल मॉनिटरिंग, आधुनिक नागरिक सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर सीसीटीवी नेटवर्क स्थापित किए जाएंगे।
किसानों को राहत देते हुए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि को भी स्वीकृति दी गई। अब धान (सामान्य) का समर्थन मूल्य ₹2441 प्रति क्विंटल होगा, जिससे प्रदेश के लाखों किसानों को लाभ मिलेगा।
सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए सप्ताह में दो दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सलाह भी दी है। वहीं चुनिंदा स्मारकों और संग्रहालयों में सीमित अवधि तक निःशुल्क प्रवेश की योजना पर भी मुहर लगी है।
यूपी सरकार के इन फैसलों को प्रशासनिक सुधार, खर्च नियंत्रण और विकास मॉडल के बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
ब्यूरो रिपोर्ट, लिबरल मीडिया
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