शाहजहांपुर | LIBERAL MEDIA
चित्रा टाकीज परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिवस शुक्रवार को कथा व्यास डा. दामोदर दीक्षित ने आत्मा और परमात्मा के मिलन, महारासलीला तथा भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कथा के क्रम में व्यास जी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण अक्रूर जी के साथ मथुरा पहुंचे, जहां मार्ग में दर्जी को भक्ति का आशीर्वाद दिया और एक माली द्वारा भगवान को माला पहनाने का प्रसंग सुनाया। इसी दौरान कंस की दासी कुब्जा से भेंट का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान की कृपा से कुब्जा का रूप सुंदर हो गया।
आगे कथा में कंस वध का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि कंस ने श्रीकृष्ण और बलराम को मारने के लिए मल्लयुद्ध का आयोजन कराया, लेकिन भगवान ने सभी पहलवानों को परास्त कर कंस का वध कर दिया। इसके बाद कारागार में बंद माता देवकी और वसुदेव को मुक्त कराया तथा नाना उग्रसेन को पुनः राजसिंहासन पर विराजमान कराया।
कथा में आगे संदीपन ऋषि के आश्रम में श्रीकृष्ण और बलराम की शिक्षा, सुदामा से मित्रता, उद्धव को वृंदावन भेजने, रुक्मिणी विवाह, प्रद्युम्न प्रकट होने और जामवंत प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया गया। व्यास जी ने सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए भक्ति और मित्रता का महत्व बताया।
कार्यक्रम की शुरुआत पुरोहित अनंतराम जी के सान्निध्य में मुख्य यजमान कमलेश कुमार खन्ना द्वारा देव पूजन से हुई। इसके बाद मंचासीन कथा व्यास और संतों का माल्यार्पण व चंदन से स्वागत किया गया।
इस दौरान रमेश त्रिपाठी, प्रसून त्रिपाठी और रामबली ने संगीत के साथ हनुमान चालीसा और भजन प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में स्वामी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज (रायबरेली), स्वामी सत्यानंद जी महाराज (पटना), रामदुलारे त्रिगुनायत, सुमन जी, राजेश जी सहित अन्य संतों ने भी आशीर्वचन दिए। कार्यक्रम का संचालन आचार्य रामानंद दीक्षित ने किया।
इस अवसर पर ध्रुव नारायण मेहरा, सुधा मेहरा, सोमनाथ कपूर, सरिता कपूर, जयप्रकाश खन्ना, चंद्रशेखर खन्ना (धीरू खन्ना), रोली खन्ना, रागिनी खन्ना, डॉ. राम मेहरोत्रा सहित अनेक भक्त उपस्थित रहे।








