शाहजहांपुर | LIBERAL MEDIA
चित्रा टाकीज परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस बुधवार को नवम और दशम स्कंध की व्याख्या के साथ भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा वाचन के दौरान नंदालय में उत्सव की झांकी प्रस्तुत की गई, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
व्यास डा. आचार्य दामोदर दीक्षित ने नवम स्कंध से कथा का आरंभ करते हुए मनु महाराज के वंश वर्णन और राजा अंबरीष की कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि राजा अंबरीष वैवस्वत मनु के प्रपौत्र और राजर्षि नाभाग के पुत्र थे। सात द्वीपों वाली पृथ्वी के स्वामी होने के बावजूद उनका मन भोग-विलास में नहीं, बल्कि भगवान की भक्ति में रमा रहता था।
कथा में उन्होंने दुर्वासा ऋषि और राजा अंबरीष के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं और भक्त के साथ अन्याय सहन नहीं करते।
इसके बाद दशम स्कंध में प्रवेश करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा का वर्णन किया गया। व्यास जी ने बताया कि किस प्रकार कंस को आकाशवाणी के माध्यम से यह ज्ञात हुआ कि देवकी का आठवां पुत्र ही उसका वध करेगा। भयभीत कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया और उनके छह पुत्रों की हत्या कर दी। बाद में भगवान श्रीकृष्ण ने अष्टम संतान के रूप में जन्म लेकर गोकुल में नंद बाबा के घर बाल लीलाएं कीं।
कथा में पूतना वध का प्रसंग भी सुनाया गया, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने विषपान कराने आई राक्षसी पूतना का उद्धार कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत खन्ना परिवार के पुरोहित द्वारा देव पूजन से हुई। इसके बाद रमेश त्रिपाठी, प्रसून त्रिपाठी और रामबली ने हनुमान चालीसा व भजनों के माध्यम से प्रभु स्तुति प्रस्तुत की। रामदुलारे त्रिगुनायत ने राम केवट संवाद सुनाकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया, जबकि पीलीभीत से आए शिवकुमार सुमन ने भी प्रेरक प्रसंग सुनाए। कार्यक्रम का संचालन आचार्य रामानंद दीक्षित ने किया।
कथा क्रम में मुख्य यजमान कमलेश कुमार खन्ना ने व्यास पीठ और विद्वानों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस अवसर पर ध्रुवनारायण मेहरा, सुधा मेहरा, सोमनाथ कपूर, सरिता कपूर, जयप्रकाश खन्ना, चंद्रशेखर खन्ना (धीरू खन्ना), रोली खन्ना, रागिनी खन्ना, डॉ. राम मेहरोत्रा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कथा के अंत में कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया, जिसमें भक्तों ने बधाई गीत गाए। इसके बाद आरती और प्रसाद वितरण के साथ कथा को विश्राम दिया गया।
आयोजकों के अनुसार पंचम दिवस की कथा गुरुवार को प्रातः 8:30 से 11:30 बजे और सायं 3:30 से 6:30 बजे तक आयोजित की जाएगी।








