- पुलिस कार्रवाई सिर्फ दिखावा? असली सरगना बेखौफ, व्हाट्सएप से चल रहा काला खेल
- शाहजहाँपुर। जनपद में सट्टे का अवैध कारोबार अब चोरी-छिपे नहीं, बल्कि एक संगठित ‘सट्टा सिंडिकेट’ के रूप में बेखौफ फल-फूल रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि यह काला धंधा बिना किसी डर के थाना क्षेत्रों में “ठेकेदारी सिस्टम” के तहत संचालित होने की चर्चाओं में है — और सबसे चौंकाने वाली बात, पुलिस की भूमिका पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
- 4 फरवरी की गिरफ्तारी: कार्रवाई या सिर्फ नाटक?
- 4 फरवरी 2026 को थाना सदर बाजार पुलिस द्वारा सुल्तान हसन की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही कहानी कहती है। आरोप है कि यह कार्रवाई महज औपचारिकता थी।
- सट्टे के असली ‘आका’ और मास्टरमाइंड आज भी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि पुलिस केवल “प्यादों” को पकड़कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है।
- गलियों से मोबाइल तक: व्हाट्सएप बना सट्टेबाजों का अड्डा
- शाहजहाँपुर में सट्टा अब चौक-चौराहों तक सीमित नहीं रहा। यह पूरी तरह डिजिटल रूप ले चुका है।
- व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए रोजाना सट्टे की सूचियां भेजी जा रही हैं, रकम का हिसाब मोबाइल पर तय हो रहा है और नुकसान उठाने वाला वही गरीब और कमजोर तबका है, जिसकी गाढ़ी कमाई इस सिस्टम में निचोड़ी जा रही है।
- थाना क्षेत्रों में ‘ठेके’, मिलीभगत के बिना कैसे संभव?
- सदर बाजार, चौक कोतवाली, बेरी चौकी, आरसी मिशन थाना और रोजा थाना क्षेत्रों में सट्टे के अवैध ‘ठेके’ तय होने की चर्चाएं आम हैं।
- सवाल साफ है — क्या यह सब स्थानीय पुलिस की जानकारी और संरक्षण के बिना संभव है?
- आरोप है कि पुराने सट्टा सरगनाओं के करीबियों ने नए नामों से नेटवर्क खड़ा कर लिया है और पुलिस की पकड़ आज भी जड़ तक नहीं पहुंच पा रही।
- जीरो टॉलरेंस नीति पर सीधा सवाल
- यह पूरा मामला मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर भी सीधा सवाल खड़ा करता है। अगर पुलिस सिर्फ छोटे मोहरे पकड़ती रही और असली अपराधी सिस्टम के भीतर सुरक्षित रहे, तो सट्टा सिंडिकेट का यह जाल और मजबूत होता जाएगा।
शाहजहाँपुर में ‘सट्टा सिंडिकेट’ का साम्राज्य
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