शाहजहांपुर / LIBERAL MEDIA
शाहजहांपुर जिले की तहसील सदर एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। रसूलपुर जहानगंज क्षेत्र में एसडीएम कोर्ट के नाम पर कूटरचित आदेश तैयार कर जमीन हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि शीबा खान ने कमलेश सक्सेना व आर.के. के साथ मिलकर फर्जी आदेश तैयार कराया, जिसे बाद में जिलाधिकारी स्तर पर कराई गई जांच में फर्जी पाया गया।
मामला वाद संख्या 135, धारा 229 बी, जेडएएलआर एक्ट से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें दिनांक 23 मई 2006 का एक कथित आदेश प्रस्तुत किया गया था। जांच में यह आदेश पूरी तरह कूटरचित निकला। इसके बावजूद हैरानी की बात यह है कि अब तक न तो उक्त फर्जी आदेश को औपचारिक रूप से निरस्त किया गया और न ही दोषी कर्मचारियों व आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है।
पीड़ित किसान राकेश का कहना है कि उसने गाटा संख्या 151, रकबा 0.296 हेक्टेयर भूमि का विधिवत बैनामा कराया है, लेकिन इसके बावजूद उसे उसकी ही जमीन पर अधिकार नहीं मिल पा रहा। किसान बीते एक वर्ष से एसडीएम सदर और तहसीलदार कार्यालय के चक्कर काट रहा है, मगर हर बार केवल आश्वासन देकर लौटा दिया जाता है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब न्यायिक एसडीएम द्वारा कराई गई जांच में आदेश फर्जी घोषित हो चुका है, तो फिर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी क्यों की जा रही है। क्या तहसील स्तर पर भूमाफियाओं और फर्जीवाड़ा करने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है, यह सवाल अब आम जनता भी पूछने लगी है।
इस संबंध में एसडीएम सदर ने बताया कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए उचित कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच पूरी कराई जा रही है और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। जो भी कर्मचारी या व्यक्ति इस फर्जीवाड़े में संलिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
फिलहाल यह मामला जिले की राजस्व व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन अपने दावों पर कितना खरा उतरता है और पीड़ित किसान को कब तक न्याय मिल पाता है।









