बांदा | LIBERAL MEDIA
बांदा की जीवनरेखा कही जाने वाली केन नदी आज गंभीर प्रदूषण की चपेट में आकर गटर में तब्दील होती नजर आ रही है। शहर के नालों का गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है, जिससे पानी जहरीला हो चुका है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1990 तक केन नदी का पानी पीने और स्नान के लिए उपयुक्त था, लेकिन 2024 में BOD स्तर 10-15 mg/L और फीकल कोलिफॉर्म 50,000 MPN/100 ml से अधिक दर्ज किया गया है, जो स्थिति की भयावहता को दर्शाता है।
करिया और निम्नी नालों का अनुपचारित सीवेज, शहर का कचरा और औद्योगिक अपशिष्ट लगातार नदी में डाला जा रहा है। नगर पालिका द्वारा अब तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
बाइट: महेश कुमार प्रजापति, जिला संयोजक (गंगा समग्र)
वहीं, जब पर्यावरण विभाग से इस मामले में जवाब लेने की कोशिश की गई तो मंडल अधिकारी माधवी कमलवंशी सवालों से बचती नजर आईं।
बाइट: माधवी कमलवंशी, पर्यावरण मंडल अधिकारी
नगर पालिका की जिम्मेदारी होने के बावजूद अधिशासी अधिकारी से संपर्क नहीं हो
केन नदी बनी नाला, प्रदूषण पर जिम्मेदारों की चुप्पी
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