लेखक: कौशलेंद्र मिश्रा व अभिनय गुप्ता
उत्तर प्रदेश की राजनीति में Suresh Kumar Khanna का नाम आज एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में स्थापित हो चुका है, जिन्होंने प्रदेश की वित्तीय व्यवस्था को न केवल स्थिरता प्रदान की, बल्कि उसे विकास की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का कार्य किया। सरल व्यक्तित्व, गहरी विषय-वस्तु की समझ और स्पष्ट दृष्टिकोण के कारण वे सत्ता पक्ष ही नहीं, बल्कि विपक्ष के बीच भी एक सशक्त और सम्मानित वित्तीय रणनीतिकार के रूप में पहचाने जाते हैं।
11 फरवरी को उनके द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला बजट उनके कार्यकाल का सातवां बजट होगा, जो इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री और सरकार को उनके अनुभव, क्षमता और निर्णयों पर कितना अटूट भरोसा है। यह बजट केवल एक वार्षिक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के भविष्य की दिशा तय करने वाला रोडमैप होता है।
•वित्तीय अनुशासन और दूरगामी दृष्टि
सुरेश खन्ना के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि उत्तर प्रदेश को ‘राजस्व अधिशेष’ (Revenue Surplus) वाला राज्य बनाए रखना है। वर्ष 2019-20 में जब उन्होंने वित्त मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला, उस समय प्रदेश का बजट आकार लगभग ₹4.79 लाख करोड़ था। निरंतर सुधार, कर-संग्रह में वृद्धि, अपव्यय पर नियंत्रण और योजनाबद्ध व्यय के माध्यम से उन्होंने बजट आकार को बढ़ाकर ₹8 लाख करोड़ (2025-26) के पार पहुँचा दिया।
उन्होंने FRBM (Fiscal Responsibility and Budget Management) नियमों के दायरे में रहकर राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखा, जो देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक के लिए आसान कार्य नहीं माना जाता। उनकी सोच केवल वर्तमान आवश्यकताओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाएँ तैयार की जाती हैं।
अपनी सरकार की दूरदृष्टि को वे सदन में अक्सर इन पंक्तियों से व्यक्त करते हैं—
“तुम सोच रहे हो बस, बादल की उड़ानों तक,
मेरी निगाहें हैं, सूरज के ठिकानों तक।”
बुनियादी ढांचे का कायाकल्प और पूंजीगत व्यय
खन्ना जी के बजटों की सबसे प्रमुख विशेषता रही है पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) पर निरंतर बढ़ता जोर। उनका स्पष्ट मानना है कि सड़क, रेल, हवाई अड्डा, औद्योगिक क्षेत्र और लॉजिस्टिक्स जैसी परिसंपत्तियों में निवेश ही किसी राज्य की आर्थिक रीढ़ मजबूत करता है।
जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, गंगा एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और डिफेंस कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के लिए किया गया रिकॉर्ड वित्तीय आवंटन इसका प्रमाण है। आज उत्तर प्रदेश को “एक्सप्रेसवे प्रदेश” कहा जाना उनके दूरदर्शी बजटीय प्रबंधन का प्रत्यक्ष परिणाम है।
जब विपक्ष इन बड़े निवेशों पर सवाल उठाता है, तो खन्ना जी पूरे आत्मविश्वास के साथ कहते हैं—
“कश्ती चलाने वालों ने जब हार के दी पतवार हमें,
लहर-लहर तूफान मिले और संग-संग मझधार हमें।
फिर भी दिखलाया है हमने और आगे दिखा भी देंगे,
इन हालातों में आता है दरिया करना पार हमें।”
•सामाजिक क्षेत्र में संतुलित निवेश
सुरेश खन्ना के बजट केवल ईंट-पत्थर और सड़कों तक सीमित नहीं हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, गरीब कल्याण, किसान सहायता और युवाओं के लिए रोजगार योजनाओं को भी बराबर महत्व दिया गया है।
स्कूलों के आधुनिकीकरण, मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के विस्तार और छात्रवृत्ति कार्यक्रमों के लिए लगातार बढ़ता बजट इस बात को दर्शाता है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुँचाने की प्रतिबद्धता है।
•संसदीय कौशल और तार्किक संवाद
सुरेश खन्ना केवल आंकड़ों के विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि एक मंझे हुए संसदीय वक्ता भी हैं। जब विपक्ष ऋण, बेरोजगारी या महंगाई पर सवाल उठाता है, तो वे भावनात्मक बहस के बजाय ठोस आंकड़ों के साथ जवाब देते हैं।
•ऋण पर दृष्टिकोण: उनका मानना है कि कर्ज तभी समस्या बनता है जब उसका उपयोग गैर-उत्पादक कार्यों में हो। यदि कर्ज से परिसंपत्तियाँ बनें और रोजगार पैदा हो, तो वही कर्ज विकास का इंजन बन जाता है।
बेरोजगारी पर पक्ष: वे स्वरोजगार योजनाओं, MSME सेक्टर और स्टार्टअप नीति के माध्यम से सृजित अवसरों का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
उनकी शैली सख्त भी है और संतुलित भी, जिससे सदन में एक स्वस्थ विमर्श बना रहता है।
•ई-बजट और डिजिटल पारदर्शिता की पहल
खन्ना जी के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश ने बजट प्रक्रिया में भी ऐतिहासिक परिवर्तन देखा। प्रदेश में ई-बजट (पेपरलेस बजट) प्रणाली लागू कर उन्होंने पारदर्शिता, समयबद्धता और आधुनिक वित्तीय प्रबंधन की मजबूत नींव रखी।
इस पहल से न केवल कागज की खपत में भारी कमी आई, बल्कि बजट दस्तावेजों की डिजिटल उपलब्धता से जनप्रतिनिधियों और आम जनता को भी बड़ी सुविधा मिली। यह कदम उत्तर प्रदेश को डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा अग्रसर करता है।
•निवेश और औद्योगिक विश्वास का विस्तार
सुरेश खन्ना के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य बनकर उभरा है। उनके कार्यकाल में प्रदेश को देश-विदेश से ₹35 से ₹40 लाख करोड़ तक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि राज्य की नीतियों, कानून-व्यवस्था और वित्तीय स्थिरता पर उद्योग जगत का भरोसा लगातार मजबूत हुआ है।
•शाहजहाँपुर से सदन तक: अटूट विश्वास का रिकॉर्ड
एक वित्त मंत्री के लिए जितनी जरूरी आर्थिक समझ है, उतनी ही जरूरी जनता की नब्ज पहचानने की क्षमता भी है। सुरेश खन्ना शाहजहाँपुर विधानसभा सीट से लगातार 9 बार (1989 से) चुनाव जीत चुके हैं।
यह रिकॉर्ड उनकी मजबूत जमीनी पकड़, संगठनात्मक क्षमता और जनता के बीच गहरी विश्वसनीयता को दर्शाता है। उनके व्यक्तित्व की इसी गहराई को ये पंक्तियाँ बयां करती हैं—
“तुम्हारी शख्सियत से ये सबक लेंगी नई नस्लें,
वही मंजिल पर पहुँचा है जो अपने पाँव चलता है।”
•रिकॉर्ड्स का सिलसिला
लगातार सातवीं बार बजट प्रस्तुति
ई-बजट प्रणाली की सफल शुरुआत
निवेश प्रस्तावों का ऐतिहासिक स्तर
पूंजीगत व्यय में निरंतर वृद्धि
सुरेश कुमार खन्ना ने उत्तर प्रदेश को “बीमारू” छवि से बाहर निकालकर एक सशक्त, आत्मनिर्भर और निवेश-अनुकूल राज्य बनाने की दिशा में ठोस वित्तीय नींव रखी है। उनका प्रत्येक बजट विकास, अनुशासन और संतुलन का समन्वय होता है।
11 फरवरी को प्रस्तुत होने वाला बजट उनके इसी विकासवादी सफर का एक और महत्वपूर्ण अध्याय सिद्ध होगा, जो उत्तर प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर बनेगा।









