78 साल बाद भी सेमरहवा पुलविहीन, नदी पार कर जिंदगी जीने को मजबूर 6 हजार ग्रामीण
महराजगंज जनपद की नौतनवा तहसील के सेमरहवा गांव की हकीकत आज भी विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है। आज़ादी के 78 साल बीत जाने के बावजूद करीब 6000 आबादी वाला यह गांव अब तक पक्के पुल से वंचित है। हालात यह हैं कि ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नदी पार करना किसी जंग से कम नहीं लगता।
बरसात के मौसम में नदी उफान पर होती है, तब ग्रामीण नाव के सहारे आवागमन करते हैं। छोटे-छोटे बच्चे इसी नाव से स्कूल जाने को मजबूर हैं। पानी कम होने पर लोग अस्थायी बांस के पुल से जान जोखिम में डालकर गुजरते हैं, जो हर वक्त टूटने का खतरा बनाए रहता है।
गांव तक न पक्की सड़क है और न ही पुल, जिसके चलते एंबुलेंस तक नहीं पहुंच पाती। प्रसव पीड़ा से जूझती महिलाओं को नाव या चारपाई पर नदी पार करानी पड़ती है। कई बार नाव में ही बच्चे का जन्म हो जाता है। बीमार मरीजों को भी इसी तरह जोखिम भरे सफर से अस्पताल पहुंचाया जाता है।








