अहंकार चाहे कितना भी बड़ा हो, उसका अंत निश्चित: संत प्रशांत प्रभु महाराज

By Liberal Media

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शाहजहांपुर। रामलीला मैदान खिरनीबाग में चल रही शिव महापुराण कथा में परम पूज्य संत श्री प्रशांत प्रभु जी महाराज ने बाणासुर के अहंकार और भगवान शिव की भक्ति की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को अहंकार से दूर रहने का संदेश दिया।

कथा व्यास ने बताया कि प्रह्लाद के वंशज एवं राजा बलि के पुत्र बाणासुर भगवान शिव के परम भक्त थे। उन्होंने हजारों वर्षों तक हिमालय की कंदराओं में निराहार रहकर “ॐ नमः शिवाय” का जाप किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने दर्शन दिए। बाणासुर ने वरदान में हजार भुजाएं प्राप्त करने के साथ भगवान शिव को अपने नगर का रक्षक बनाने की इच्छा व्यक्त की। भगवान शिव ने उसे अजेय होने का आशीर्वाद दिया।

शक्ति और वरदान मिलने के बाद बाणासुर के भीतर अहंकार उत्पन्न हो गया। वह युद्ध के लिए इतना आतुर हो गया कि उसने भगवान शिव तक को युद्ध की चुनौती दे डाली। बाद में उसकी पुत्री उषा ने स्वप्न में भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध को देखा और उनसे प्रेम कर बैठी। उषा की सहेली चित्रलेखा अनिरुद्ध को द्वारका से शोणितपुर ले आई। बाणासुर को जानकारी हुई तो उसने अनिरुद्ध को नागपाश में बंदी बना लिया।

अनिरुद्ध को मुक्त कराने के लिए भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और यादव सेना शोणितपुर पहुंचे। बाणासुर की रक्षा का वचन भगवान शिव ने दे रखा था, जिसके कारण श्रीकृष्ण और भगवान शिव के बीच भीषण युद्ध हुआ। अंततः भगवान श्रीकृष्ण ने बाणासुर की हजार भुजाओं में से अधिकांश को काट दिया। जब उसकी केवल चार भुजाएं शेष रह गईं तो भगवान शिव ने श्रीकृष्ण से बाणासुर के प्राण न लेने की प्रार्थना की। भगवान श्रीकृष्ण ने बाणासुर को जीवनदान दिया और उसका अहंकार समाप्त किया। इसके बाद बाणासुर ने अपनी भूल स्वीकार कर उषा और अनिरुद्ध का विवाह कराया।

संत प्रशांत प्रभु महाराज ने कहा कि मनुष्य चाहे कितना ही बड़ा भक्त, शक्तिशाली या संपन्न क्यों न हो, यदि उसके भीतर अहंकार आ जाए तो उसका पतन निश्चित है। भगवान अपने भक्तों का कल्याण करने के लिए उनके अहंकार को नष्ट करते हैं। कथा का यही सबसे बड़ा संदेश है कि शक्ति के साथ विनम्रता और भक्ति के साथ सदाचार आवश्यक है।

श्रद्धालुओं ने किया आरती-पूजन

कथा के उपरांत आचार्य विवेकानंद शास्त्री, काशी-बनारस के सानिध्य में विधि-विधान से आरती एवं पूजन कराया गया। आरती-पूजन में अवधेश मिश्रा, अक्षय तिवारी, श्रीदत्त शुक्ला, मुनेश्वर सिंह, रामचंद्र सिंगल, उद्योगपति अशोक गुप्ता, उद्योगपति हरि शरण बाजपेयी, विश्व मोहन बाजपेयी, ठाकुर अखिलेश सिंह, गौरव त्रिपाठी एवं नीरज बाजपेयी सहित श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। इस दौरान रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और भक्ति में लीन होकर कथा का श्रवण किया।

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