शाहजहांपुर | LIBERAL MEDIA
शाहजहांपुर के खिरनी बाग स्थित रामचरण लाल धर्मशाला में दिव्य ज्योति जागृत संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय संगीतमय श्री हरिकथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के दूसरे दिन साध्वी सुरजीता कुमारी एवं साध्वी सुर्वा भारती ने भक्तों को माता सती और भगवान राम से जुड़ा प्रसंग सुनाया।
कथा में बताया गया कि भगवान को बुद्धि से नहीं, बल्कि प्रेम और भक्ति से प्राप्त किया जा सकता है। त्रेतायुग में जब भगवान राम माता सीता की खोज में वन-वन भटक रहे थे, तब यह दृश्य देखकर देवी सती के मन में संशय उत्पन्न हुआ। उन्होंने भगवान राम की परीक्षा लेने का निश्चय किया।
भगवान शिव के समझाने के बावजूद माता सती सीता का रूप धारण कर भगवान राम के सामने पहुंचीं। लेकिन भगवान राम ने तुरंत उन्हें पहचान लिया और भगवान शिव के बारे में पूछ लिया। इससे माता सती का भ्रम टूट गया और उन्हें विश्वास हो गया कि भगवान राम ही श्री हरि विष्णु के अवतार हैं।
कथा में आगे बताया गया कि कैलाश लौटने पर माता सती ने भगवान शिव से असत्य कहा, जिसे भगवान शिव ने ध्यान के माध्यम से जान लिया।
माता सती ने कैसे ली भगवान राम की परीक्षा, कथा में सुनाया प्रसंग
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