(वरिष्ठ पत्रकार एवं सीईओ, लिबरल मीडिया)
आज के दौर में सवाल पूछना सहज नहीं रहा। जब सत्ता असहज हो, व्यवस्था संवेदनहीन हो और मीडिया का एक बड़ा हिस्सा ‘सुविधा की चुप्पी’ ओढ़कर खड़ा दिखाई देता हो, तब पत्रकारिता के मूल अस्तित्व पर संकट मंडराने लगता है। ऐसे माहौल में यदि कोई मंच बेबाक सवाल पूछने का दावा करे, तो उसे संदेह की निगाह से देखा जाता है। ‘VIP TALK’ उसी संदेह को चुनौती देने और पत्रकारिता के खोए हुए विश्वास को बहाल करने का एक वैचारिक प्रयास है।
पत्रकारिता का मूल स्वभाव प्रश्न करना है-न कि केवल सत्तातंत्र के बयानों को दोहराना। दुर्भाग्य से, आज की मुख्यधारा की पत्रकारिता अक्सर सत्ता की भाषा बोलती नज़र आती है। चमकदार सुर्खियाँ तो बहुत हैं, लेकिन उनमें से ज़मीनी सच्चाई गायब है। ‘लिबरल मीडिया’ इस विडंबना को स्पष्ट रूप से स्वीकार करता है कि हम तटस्थता की आड़ में उन मुद्दों पर मौन नहीं रहेंगे, जहाँ बोलना अनिवार्य है।
‘VIP TALK’ कोई मनोरंजन कार्यक्रम नहीं, बल्कि संवाद का वह मंच है जो असहज करता है, व्यवस्था को सवालों के घेरे में लाता है और जवाब माँगता है। विशेषकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में, जहाँ आम आदमी की समस्याएँ अक्सर सरकारी आँकड़ों के नीचे दबा दी जाती हैं, यह मंच उन आवाजों को सामने लाएगा जिन्हें अब तक अनसुना किया गया।
इस शो में मेरे साथ प्रखर वक्ता और एंकर गौरांशी होंगी, जिनकी ओजस्वी शैली और संतुलित प्रस्तुति इस संवाद को और भी प्रभावी बनाएगी। कभी मेरे विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, तो कभी गौरांशी जी के प्रखर सवालों के माध्यम से, यह कार्यक्रम समाज के ज्वलंत मुद्दों को सार्वजनिक पटल पर रखेगा। साथ ही, लिबरल मीडिया के सम्पादक कौशलेन्द्र मिश्रा की निर्भीक शैली इस संवाद को सजावटी नहीं, बल्कि सार्थक बनाएगी। यहाँ सवाल टीआरपी की दौड़ के लिए नहीं, बल्कि इसलिए पूछे जाएंगे ताकि जवाब ‘ऑन रिकॉर्ड’ आएँ।
इस शो की सबसे बड़ी खासियत इसकी व्यापक सहभागिता है। यह केवल स्टूडियो तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज के हर वर्ग को जोड़ने का प्रयास करेगा। हमारा विश्वास है कि हर व्यक्ति के पास कहने के लिए कुछ महत्वपूर्ण होता है। चाहे वह किसान हो, युवा हो, महिला हो, कर्मचारी हो या कोई जनप्रतिनिधि-‘VIP TALK’ सबके लिए खुला मंच है। यह कार्यक्रम केवल ‘रसूखदार’ लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम नागरिक को ‘विशेष’ स्थान देने का एक संकल्प है। हमारा उद्देश्य साफ है-संवाद, सवाल और सच।











बहुत अच्छा लिखा है। विचार करने की बातें। समाज में अब प्रश्नाकूलता घट रही है। जयजयकार पर्व चल रहा है। प्रश्न करना और जिज्ञासु होना जीवित होने की निशानी है। अच्छे और प्रेरक उत्तेजक विचार पढ़ने को नहीं मिलते बस अनुगमन,अनुसरण का दोहराव हरेक दिशा में दिख रहा है। भाषा का तेवर भी गायब हो रहा है। उम्मीद है कि कुछ रोशनी पैदा होगी दिल दिमाग़ खुलेंगे और कलम और वाणी अपने धर्म का पालन करेगी।
शुभकामना और बधाई।
अंग भीड़ का कहलाते हैं,बनी राह पर चलनेवाले
वंदनीय वे चरण कि जिनके नीचे बनता पथ चलता है!