● अमित त्रिवेदी
उन्नाव(ब्यूरो)। शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है, और इसकी सबसे बड़ी वजह अवैध बसों व टेंपो अड्डों का बेखौफ संचालन है। यातायात विभाग और पुलिस चौकी की नाक के नीचे चल रहा यह अवैध कारोबार अब सवाल नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का खुला प्रमाण बन चुका है।
शहर के सबसे व्यस्त पीक चौराहे पर, आईबीपी पेट्रोल पंप के ठीक सामने, पुरवा–मौरावां रूट की बसों और टेंपो द्वारा दिनभर खुलेआम सवारियां भरी जा रही हैं। यही नहीं, इसी अवैध अड्डे के कारण चौराहे पर हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे आम जनता का जीना मुहाल है।
हैरानी की बात यह है कि इसी चौराहे के आसपास यातायात विभाग का कार्यालय और सदर पुलिस चौकी मौजूद है, फिर भी न तो अवैध अड्डे हटाए जा रहे हैं और न ही जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई हो रही है। सवाल यह उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में यह सब चल रहा है?
शहर में भारी वाहनों की एंट्री पर रोक के तमाम दावे किए गए, लेकिन हकीकत यह है कि बड़े वाहन बेधड़क शहर के अंदर घुस रहे हैं और जाम को और भयावह बना रहे हैं। पीक चौराहा, जो रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है, अब स्थायी जाम पॉइंट में तब्दील हो चुका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें की गईं। कुछ दिन दिखावटी कार्रवाई होती है, फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। जाम से सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, मरीजों, व्यापारियों और रोज़मर्रा के राहगीरों को झेलनी पड़ रही है।
सूत्रों की मानें तो कथित रूप से पुलिस और सत्ताधारी संरक्षण के चलते अवैध पुरवा–मौरावां बस अड्डा पूरे दबदबे के साथ संचालित हो रहा है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में उन्नाव की यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और पुलिस इस खुलेआम चल रही अराजकता पर कार्रवाई करेगा, या फिर शहरवासी यूं ही जाम और अव्यवस्था की कीमत चुकाते रहेंगे?








