शाहजहांपुर | LIBERAL MEDIA
चित्रा टाकीज परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सप्तम दिवस शनिवार को कथा व्यास डा. दामोदर दीक्षित ने श्रद्धालुओं को जीवन के मूल्यों और आध्यात्मिक मार्ग का संदेश दिया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि रूप, विद्या, धन और अधिकार चार ऐसे नशे हैं, जिनमें फंसकर मनुष्य अपने जीवन के वास्तविक लक्ष्य से भटक जाता है।

उन्होंने बताया कि राग, रोष, ईर्ष्या, मद और मोह मनुष्य के पांच बड़े शत्रु हैं, जिनसे बचकर रहना चाहिए, अन्यथा जीवन में कष्ट अवश्य आते हैं। कथा में सुदामा चरित्र का भी मार्मिक वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
डा. दामोदर दीक्षित ने उन लोगों के कल्याण के लिए, जो पूरी कथा नहीं सुन पाए, श्रीमद्भागवत के बारह स्कंधों का सार भी संक्षेप में प्रस्तुत किया और अनेक उदाहरणों के माध्यम से बताया कि काल्पनिक सुख के अभाव का नाम ही दुःख है।
कार्यक्रम की शुरुआत पुरोहित अनंतराम जी के सान्निध्य में मुख्य यजमान कमलेश कुमार खन्ना द्वारा देव पूजन से हुई। इसके बाद मंचासीन कथा व्यास और संतों का माल्यार्पण व चंदन से स्वागत किया गया।
इस अवसर पर रमेश त्रिपाठी, प्रसून त्रिपाठी और रामबली ने हनुमान चालीसा और भजन प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में स्वामी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज (रायबरेली), स्वामी सत्यानंद जी महाराज (पटना), रामदुलारे त्रिगुणायत, सुमन जी, राजेश जी सहित कई संतों ने संक्षिप्त प्रवचन और आशीर्वचन दिए। कार्यक्रम का संचालन आचार्य रामानंद दीक्षित ने किया।
सायंकाल उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने भी कथा में पहुंचकर संतों का आशीर्वाद लिया। अंत में आरती और प्रसाद वितरण के साथ कथा को विश्राम दिया गया।
आयोजकों ने बताया कि 15 मार्च को संत सम्मेलन और भंडारा प्रसाद वितरण के साथ कथा की पूर्णाहुति होगी। संत सम्मेलन में स्वामी सत्यानंद जी, स्वामी ज्योतिर्मयानंद जी, स्वामी अक्षयानंद जी, पं. अवधेश दीक्षित, पं. ब्रजेश पाठक, पं. शिवकुमार सुमन और पं. रामदुलारे त्रिगुणायत सहित कई संतों के प्रवचन होंगे।








