शाहजहाँपुर (Liberal Media): शाहजहाँपुर की पावन धरा एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है। श्री रामचन्द्र मिशन के अध्यक्ष और हार्टफुलनेस मेडिटेशन के वैश्विक मार्गदर्शक पूज्य कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य में आयोजित ‘बसंत उत्सव–2026’ के दूसरे दिन आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। देश-विदेश से आए हजारों साधकों ने सामूहिक ध्यान के माध्यम से चेतना की ऊर्ध्व यात्रा का अनुभव किया।

आंतरिक शांति और गृहस्थ जीवन में संतुलन का संदेश
आश्रम परिसर में आयोजित सामूहिक ध्यान सत्र के दौरान पूज्य दाजी ने साधकों को प्रेरित करते हुए कहा कि आध्यात्मिक साधना व्यक्ति को संसार से भागना नहीं, बल्कि गृहस्थ जीवन में संतुलन बिठाते हुए परम सत्ता से जुड़ना सिखाती है। उन्होंने दैवीय प्राणाहुति (Transmission) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे निष्ठापूर्ण अभ्यास से अल्प समय में ही गहन आध्यात्मिक अवस्थाओं को प्राप्त किया जा सकता है।
बाबूजी महाराज और लाला जी महाराज की विरासत का स्मरण
दाजी ने अपने संबोधन में मिशन के आदि गुरु लाला जी महाराज और बाबूजी महाराज के योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि यह विद्या मानवता के लिए आंतरिक जागृति का सबसे सशक्त माध्यम है। कार्यक्रम के दौरान बाबूजी महाराज के प्रपौत्र विनीत चंद्रा ने पारिवारिक संस्मरण साझा किए, जिससे माहौल और भी भावुक और आध्यात्मिक हो गया।
“चेतना के उच्चतर आयामों तक पहुँचने के लिए प्रेम, करुणा और निरंतर अभ्यास की आवश्यकता है। यह मार्ग ही विश्व शांति और मानव कल्याण का आधार है।” – पूज्य दाजी
हजारों साधकों ने किया विश्व शांति के लिए ध्यान
बसंत उत्सव के इस चरण में हजारों की संख्या में अभ्यासी शामिल हुए। सायंकालीन ध्यान सत्र में भी उतनी ही ऊर्जा और शांति का अनुभव किया गया। मिशन के वरिष्ठ अभ्यासी रघुवीर अग्रवाल ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए उद्घाटन समारोह की स्मृतियों को ताजा किया।








