फिल्म के मेकर्स पर FIR, विवाद ने लिया कानूनी–राजनीतिक मोड़
संभल/बहजोई | लिबरल मीडिया
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ को लेकर शुरू हुआ विरोध अब कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले चुका है। फिल्म के शीर्षक और कथित कथानक पर आपत्ति जताते हुए यादव समाज और समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर फिल्म पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने निर्माता, निर्देशक और प्रमुख कलाकारों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। धनारी थाने में दर्ज एफआईआर के बाद संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जांच में शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है विवाद की वजह?
फिल्म के ट्रेलर के अनुसार यह एक त्रिकोणीय प्रेम कहानी है, जिसमें ‘सिंपल यादव’ नामक युवती को ‘वसीम अख्तर’ से प्रेम हो जाता है, जबकि उसका परिवार उसकी शादी ‘अभिमन्यु यादव’ से कराना चाहता है। विरोध कर रहे संगठनों का आरोप है कि फिल्म में एक जाति विशेष के नाम का प्रयोग कर पूरे समुदाय की छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
कुछ संगठनों ने इसे सांप्रदायिक संतुलन बिगाड़ने वाला बताते हुए ‘लव जिहाद’ नैरेटिव को बढ़ावा देने का प्रयास करार दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि क्षेत्र की सामाजिक संरचना को देखते हुए ऐसे विषयों पर आधारित फिल्म तनाव उत्पन्न कर सकती है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आगे की स्थिति
संभल के कई राजनीतिक चेहरों ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। विरोध प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने फिल्म की स्क्रीनिंग रोकने की मांग करते हुए प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की अपील की है।
वहीं, फिल्म की अभिनेत्री प्रगति तिवारी ने बयान जारी कर कहा है कि फिल्म पूरी तरह काल्पनिक है और किसी भी समाज या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का उद्देश्य नहीं है।
27 फरवरी को प्रस्तावित रिलीज अब अनिश्चितता में घिरती दिख रही है। सपा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि फिल्म रिलीज की गई तो वे सिनेमाघरों के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जांच के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।








