वैशाली (बिहार): रिश्तों को कलंकित करने वाले एक बेहद संवेदनशील मामले में वैशाली जिला अदालत ने अपना कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने एक नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म के दोषी उसके चचेरे भाई और उसके मित्र को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया है।
डीएनए रिपोर्ट ने खोली पोल
यह मामला साल 2022 का है, जब पीड़िता के गर्भवती होने के बाद इस जघन्य अपराध का खुलासा हुआ था। पीड़िता ने बाद में एक बच्चे को जन्म दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों का सहारा लिया। डीएनए (DNA) टेस्ट की रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई कि पीड़िता के बच्चे का जैविक पिता उसका अपना चचेरा भाई ही है। इसी पुख्ता सबूत ने आरोपियों को सजा के मुहाने तक पहुँचाने में मुख्य भूमिका निभाई।
घटना का संक्षिप्त विवरण
मामला: सितंबर 2022 में पीड़िता के गर्भवती होने पर परिजनों को मामले की भनक लगी।
आरोप: चचेरे भाई ने अपने दोस्त के साथ मिलकर नाबालिग के साथ बार-बार दुष्कर्म किया था।
अदालत की टिप्पणी: सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कड़ी सजा की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने दोनों दोषियों को जेल भेजने का आदेश दिया।
न्याय की जीत: इस फैसले को स्थानीय प्रशासन और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने न्याय की बड़ी जीत बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि डीएनए जैसे वैज्ञानिक साक्ष्य ऐसे मामलों में दोषियों को बचने का कोई रास्ता नहीं छोड़ते।
रिश्तों का कत्ल: नाबालिग चचेरी बहन से सामूहिक दुष्कर्म मामले में भाई समेत दो को 20-20 साल की सजा
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