मंच पर चढ़ते समय बिगड़ा संतुलन, औंधे मुंह गिरे बृजभूषण सिंह , मुस्कुराते हुए संभाला माहौल

By Liberal Media

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Gonda | Liberal Media
राजनीति के अखाड़े में बड़े-बड़ों को ‘चारों खाने चित’ करने वाले पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को बीते दिन खुद जमीन ने पटखनी दे दी। गोंडा के एक कार्यक्रम में मंच पर चढ़ते समय नेताजी का संतुलन ऐसा बिगड़ा कि वे सीधे ‘धरती पुत्र’ मुद्रा में आ गए। क्षण भर के लिए समर्थकों की सांसें थम गईं, पर अगले ही पल नेताजी ने मुस्कुराकर यह साफ कर दिया कि गिरना भी उनके ‘स्टाइल’ का हिस्सा है।
● ​न्यूटन का नियम और नेताजी का ‘नमन’
​प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो नेताजी मंच की सीढ़ियां चढ़ रहे थे, तभी शायद गुरुत्वाकर्षण को उनसे कुछ ज्यादा ही लगाव हो गया। वे औंधे मुंह गिरे, जिसे देखकर वहां मौजूद भीड़ को लगा कि शायद नेताजी ने चुनावी ‘ग्राउंड रियलिटी’ को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया है। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें उठाने में फुर्ती दिखाई, लेकिन तब तक कैमरा और ‘किस्मत’ अपना काम कर चुके थे।
​फिसलन मंच की थी या किस्मत की?
​गिरने के बाद चोट पर सहलाने के बजाय बृजभूषण जी ने अपनी चिर-परिचित मुस्कान बिखेरी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि यह महज एक ‘फिजिकल स्लिप’ थी या आने वाले समय के लिए कोई ‘मेटाफॉरिकल’ संकेत? खैर, समर्थकों का कहना है कि “शेर अगर दो कदम पीछे खींचता है या एक बार गिरता है, तो वह ऊंची छलांग की तैयारी होती है।”
​मुस्कुराहट में छिपा संदेश
​धूल झाड़ते हुए खड़े हुए नेताजी ने माहौल को ऐसे संभाला जैसे वे गिर नहीं रहे थे, बल्कि मंच की मजबूती चेक कर रहे थे। उन्होंने अपनी मुस्कान से विरोधियों को यह संदेश दे दिया कि- “हम गिरे तो भी क्या, चर्चा तो हमारी ही हो रही है।”
​★ राजनीति में पैर जमने से पहले मंच पर पैर जमना कितना जरूरी है, यह कल गोंडा ने देख लिया।

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