नववर्ष आया, संकल्प गए… बोतलें खुलीं, जाम उठे और राजस्व ने भी मनाया जश्न

By Liberal Media

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शाहजहांपुर। नववर्ष की पूर्व संध्या पर जनपद में जश्न कम और सरकारी खजाने की बोतलें ज़्यादा खुलीं। साल बदलने से पहले ही लोगों ने पुराने ग़म और नए संकल्प-दोनों को गिलास में घोल दिया। इसका सुखद (सरकारी दृष्टि से) नतीजा यह रहा कि महज़ एक रात में 2.10 करोड़ रुपये की शराब बह गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में पूरे 10 लाख रुपये अधिक है। यानी जश्न के साथ–साथ राजस्व भी खुशी से झूम उठा।
इस बार आबकारी विभाग की दरियादिली भी रंग लाई। जनपद की कुल 266 शराब दुकानों को रात 10 बजे की बजाय 11 बजे तक खुला रखने की अनुमति दी गई। बस एक घंटे की यह “अतिरिक्त आज़ादी” ऐसी साबित हुई कि शराब प्रेमियों ने समय का पूरा उपयोग किया और सरकारी खजाने की सेहत में भी सुधार आ गया। बिक्री का ग्राफ बोतल की गर्दन की तरह ऊपर चढ़ता चला गया और राजस्व विभाग के चेहरे पर अनकही मुस्कान तैर गई।
सामान्य दिनों में जहां जनपद में प्रतिदिन औसतन 1.25 करोड़ रुपये की शराब बिकती है, वहीं नववर्ष पर यह आंकड़ा जश्न के शिखर पर पहुंच गया। देसी शराब ने अपनी सादगी से एक करोड़ रुपये की कमाई कर डाली-क्योंकि संकट के समय भी परंपराएं नहीं बदलतीं। अंग्रेजी शराब ने 80 लाख रुपये में ‘क्लास’ का प्रदर्शन किया और बीयर ने 30 लाख रुपये की बिक्री कर ठंड के मौसम में अपनी उपयोगिता साबित की। इन सबके बीच सरकार का खाता भी संतुलित रहा, बल्कि कुछ बेहतर ही हो गया।
दुकानदार पहले से पूरी तैयारी में थे। इस बार स्टॉक कुछ ज़्यादा रखा गया था, क्योंकि उन्हें पता था कि नववर्ष की रात संकल्प सबसे पहले टूटते हैं और बोतलों की सील बाद में। “बस आख़िरी पैग” की परंपरा पूरी रात पूरी श्रद्धा से निभाई गई-और हर पैग के साथ राजस्व में एक और बूंद जुड़ती चली गई।
आबकारी निरीक्षक सदर सौरभ यादव के अनुसार, शहरी क्षेत्र में शाह क्लब, सत्यम इंपीरिया और पार्क इन ने नववर्ष के लिए एक दिन का ओकेजनल बार लाइसेंस भी जारी कराया। इसके लिए निर्धारित 11 हजार रुपये का शुल्क जमा कराया गया। इससे यह साफ हो गया कि शाहजहांपुर में जश्न अब सिर्फ भावनाओं से नहीं, बल्कि चालान और रसीद के साथ मनाया जाता है-ताकि आनंद के साथ राजस्व भी पूरी तरह वैध रहे।
कुल मिलाकर, शाहजहांपुर में नए साल का स्वागत न फूलों से हुआ, न पटाखों से-बल्कि बोतलों की खनक, कैश काउंटर की खड़खड़ाहट और सरकारी आंकड़ों की चमक से हुआ।
कह सकते हैं कि यहां नववर्ष का पहला और सबसे मज़बूत संकल्प यही रहा-
“जश्न भी होगा और राजस्व भी बढ़ेगा।”

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