शाहजहांपुर (Liberal Media News Desk): उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोर सकती हैं। वर्दी का काम लोगों के आंसू पोंछना होता है, लेकिन यहां शाहजहांपुर पुलिस (Shahjahanpur Police) ने एक लाचार पिता के आंसुओं का जवाब थप्पड़ों से दिया।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान एक 16 वर्षीय किशोर की मौत हो गई। बेटे का शव देखकर पिता बदहवास होकर रोने लगा, लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मी ने उसे ढांढस बंधाने के बजाय थप्पड़ जड़ दिए। इस घटना ने पूरे सिस्टम और खाकी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, 16 वर्षीय अंकित सिंह को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद अंकित जिंदगी की जंग हार गया। जवान बेटे की मौत की खबर सुनते ही पिता अपना मानसिक संतुलन खो बैठे और शव के पास फूट-फूटकर रोने लगे। वह डॉक्टरों से अपने बच्चे को लेकर कुछ सवाल पूछ रहे थे, जो एक पिता का स्वाभाविक हक है।
शोक में डूबे पिता को घसीटकर ले गई पुलिस
मौके पर मौजूद चश्मदीदों के मुताबिक, पीड़ित पिता ने कोई हंगामा या तोड़फोड़ नहीं की थी। वह सिर्फ अपने बेटे के गम में बिलख रहा था। लेकिन वहां खड़े एक सिपाही को एक पिता का रोना नागवार गुजरा।
आरोप है कि सिपाही ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय पुलिसिया रौब (Police Brutality) दिखाते हुए रोते हुए पिता पर थप्पड़ बरसा दिए। हद तो तब हो गई जब पुलिस उसे जबरन घसीटते हुए वहां से ले गई और पुलिस चौकी में बंद कर दिया। जिस पिता की दुनिया उजड़ गई, उसी को अपराधी की तरह ट्रीट किया गया।
सिस्टम पर उठे सवाल
इस शर्मनाक घटना के बाद ट्रॉमा सेंटर परिसर में मौजूद लोगों में गुस्सा फूट पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो (Viral Video) ने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की कलई खोल दी है। Liberal Media यह सवाल पूछता है कि क्या वर्दी पहनने के बाद संवेदनाएं मर जाती हैं? क्या एक शोकग्रस्त पिता से भी इंसान की तरह पेश नहीं आया जा सकता?
फिलहाल, सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को शेयर कर रहे हैं और दोषी पुलिसकर्मी पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी भी कई सवालों को जन्म दे रही है।








