नई दिल्ली। कांग्रेस द्वारा देशभर में चुनावी पारदर्शिता और कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ आयोजित रैली उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर इसमें शामिल नहीं हुए। जिस मुद्दे को कांग्रेस लोकतंत्र पर सीधा हमला बता रही है, उसी पर पार्टी के बड़े चेहरे की अनुपस्थिति ने अंदरूनी असहजता उजागर कर दी है।
रैली से दूरी पर जब शशि थरूर से सवाल किया गया तो उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा- “सब बिल्कुल ठीक है।” लेकिन यह एक पंक्ति कई सवाल छोड़ गई। क्या कांग्रेस के भीतर ‘वोट चोरी’ के नैरेटिव पर पूरी एकजुटता नहीं है? या फिर पार्टी नेतृत्व और कुछ वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं ?
सूत्रों की मानें तो थरूर की व्यस्तताओं और विदेश दौरे को वजह बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे महज़ संयोग मानने को कोई तैयार नहीं। कांग्रेस जिस मुद्दे को लोकतंत्र की लड़ाई बता रही है, उस पर उसका ही एक बड़ा चेहरा मंच से गायब रहे-यह विरोधाभास विपक्ष को हमला करने का मौका दे रहा है।
एक तरफ कांग्रेस चुनावी प्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर उठते ये संकेत संदेश दे रहे हैं कि सब कुछ ‘ठीक’ होने के दावे के बावजूद अंदरखाने बहुत कुछ ठीक नहीं है।








