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●वैश्विक सत्ता संतुलन में भारत की एंट्री की सुगबुगाहट
BRICS की अध्यक्षता
भारत को मिलने से वैश्विक कूटनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। इसी बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचाने वाला माना जा रहा है। मैक्रों ने साफ कहा है कि भारत BRICS का अध्यक्ष बनने जा रहा है और वह भारत के साथ मिलकर मध्यस्थता की भूमिका निभाना चाहते हैं।
मैक्रों का यह बयान उस समय आया है, जब BRICS और G7 के बीच वैश्विक वर्चस्व को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ चुकी है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने दो टूक कहा कि BRICS देशों को G7 विरोधी नहीं बनना चाहिए और न ही G7 को BRICS के खिलाफ खड़ा होना चाहिए—यह बयान दरअसल पश्चिमी खेमे की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत के BRICS अध्यक्ष बनने से उसकी वैश्विक भूमिका और मजबूत होगी, और यही कारण है कि यूरोपीय देश अब भारत को संतुलनकारी शक्ति के रूप में देख रहे हैं। मैक्रों द्वारा अगले माह भारत दौरे की घोषणा भी इसी रणनीति की ओर इशारा करती है।
स्पष्ट है कि BRICS में भारत की बढ़ती ताकत ने पश्चिमी देशों को नई रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है और वैश्विक मंच पर भारत अब सिर्फ भागीदार नहीं, बल्कि दिशा तय करने वाला देश बनता जा रहा है।














