लखनऊ। शायरी की दुनिया में इंसानियत और संवेदनाओं की आवाज़ बनने वाले दिवंगत शायर मुनव्वर राणा की बेटी हिबा राणा आज खुद इंसाफ के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। जिस समाज में बेटियों की इज़्ज़त और सुरक्षा की बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, उसी समाज के भीतर हिबा जैसी महिलाएं दहेज लोभियों और अत्याचारियों का शिकार हो रही हैं।
हिबा राणा ने लखनऊ के सहादतगंज थाना में अपने पति और ससुर के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई है। आरोप बेहद गंभीर हैं-शादी के बाद से ही दहेज की लगातार मांग, मांग पूरी होने के बावजूद नई-नई डिमांड, विरोध करने पर मारपीट और अंततः तीन बार तलाक बोलकर घर से निकाल देना।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हिबा के परिजनों ने कई बार ससुराल पक्ष की मांगों को पूरा किया, लेकिन लालच की भूख कम होने के बजाय और बढ़ती गई। यह मामला सिर्फ घरेलू विवाद नहीं, बल्कि दहेज रूपी उस गंदी मानसिकता का आईना है, जो आज भी समाज के भीतर जिंदा है।
हिबा का आरोप है कि शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना लंबे समय से जारी थी, लेकिन जब उन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें तलाक का हथियार दिखाकर सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया गया।
थाना पुलिस का कहना है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जांच चल रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है- क्या जांच सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहेगी या दोषियों पर सख्त कार्रवाई भी होगी?
यह मामला सिर्फ हिबा राणा का नहीं, बल्कि उन हजारों महिलाओं का है जो आज भी दहेज, हिंसा और तीन तलाक जैसे कुप्रथाओं का शिकार हो रही हैं। समाज और सिस्टम-दोनों को तय करना होगा कि वे पीड़िता के साथ खड़े हैं या आरोपियों के मौन समर्थक बनकर रहेंगे।
दिवंगत शायर मुनव्वर राणा की बेटी हिबा राणा ने पति और ससुर पर तीन तलाक व दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया
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