New Delhi | Liberal Media
जिस दिल्ली को देश की राजधानी होने का गौरव प्राप्त है, उसी दिल्ली की सड़कों पर हर रात कानून, नैतिकता और व्यवस्था का खुला मखौल उड़ाया जा रहा है। रात 10 बजते ही राजधानी के कई पॉश इलाकों में मर्दों के जिस्म की ‘मंडी’ सज जाती है-जिसे अंदरखाने ‘जिगोलो मार्केट’ कहा जाता है।
यह कोई छिपा हुआ या गुप्त धंधा नहीं, बल्कि पुलिस चौकियों और सीसीटीवी कैमरों के साए में चल रहा एक संगठित अवैध कारोबार है।
●पॉश इलाकों में खुलेआम सौदे, प्रशासन बेखबर या मौन?
सरोजनी नगर, लाजपत नगर, पालिका बाजार, कमला नगर, साउथ एक्सटेंशन, कनॉट प्लेस, आईएनए, जेएनयू रोड और जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर-ये वे इलाके हैं जहां रात ढलते ही युवा सड़कों पर खड़े हो जाते हैं।
गाड़ियां रुकती हैं, सौदे तय होते हैं और कुछ ही मिनटों में गाड़ी अंधेरे में गायब हो जाती है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध कारोबार की प्रमुख ग्राहक वे महिलाएं बताई जाती हैं, जिन्हें समाज में ‘संभ्रांत’ और ‘पॉश’ वर्ग का हिस्सा माना जाता है।
● क्लब, पब और होटल-जिस्मफरोशी के सुरक्षित ठिकाने
सूत्र बताते हैं कि हाई-फाई क्लब, पब, डिस्को और कॉफी हाउस अब केवल मनोरंजन स्थल नहीं रहे, बल्कि अवैध देह व्यापार के सॉफ्ट टारगेट ज़ोन बन चुके हैं।
बुकिंग रेट तय हैं, समय तय है और नेटवर्क पूरी तरह प्रोफेशनल है-मानो यह कोई वैध कॉरपोरेट बिज़नेस हो।
●कॉरपोरेट मॉडल पर चल रहा गंदा खेल
यह कोई व्यक्तिगत मजबूरी नहीं, बल्कि एक संगठित रैकेट है।
युवाओं से 20% कमीशन वसूला जाता है
●एजेंट और नेटवर्क सक्रिय हैं
‘डिमांड और सप्लाई’ का पूरा गणित मौजूद है
इस दलदल में फंसे युवाओं में बड़ी संख्या उन छात्रों की है जो इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी कर रहे हैं-यानी देश का भविष्य।
●होटलों में अलग पहचान, सड़कों पर अलग संकेत
साउथ दिल्ली के कई बड़े होटलों में यह धंधा और भी शातिर तरीके से चल रहा है। यहां पहचान किसी संकेत या इशारे से होती है, ताकि बाहर से सब कुछ ‘सभ्य’ दिखे।
रेस्तरां में बैठकर कॉफी की चुस्कियों के बीच ग्राहक तलाशे जाते हैं-और होटल प्रबंधन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
◆सबसे बड़ा सवाल: पुलिस और प्रशासन कहाँ है?
जब सब कुछ खुलेआम चल रहा है ,
★जगहें तय हैं
★समय तय है
★रेट तय हैं
● तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या यह प्रशासनिक नाकामी है या जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
●यह सिर्फ नैतिकता नहीं, कानून और सुरक्षा का मुद्दा
यह मामला केवल सामाजिक गिरावट का नहीं, बल्कि ,कानून-व्यवस्था , संगठित अपराध , युवाओं के शोषण , और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।
राजधानी की सड़कों पर हर रात लगने वाली यह ‘मंडी’ बताती है कि अगर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई,
तो भविष्य में हालात और भयावह होंगे।











