शाहजहांपुर | LIBERAL MEDIA
चित्रा टाकीज परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के पंचम दिवस गुरुवार को कथा व्यास डा. आचार्य दामोदर दीक्षित ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान गोचारण लीला, गोवर्धन लीला, चीर हरण और रासलीला के प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
व्यास जी ने बताया कि एक बार ग्वालबालों ने माता यशोदा से शिकायत की कि कृष्ण ने मिट्टी खाई है। जब माता यशोदा ने उनसे मुंह खोलने को कहा तो उनके मुख में अखिल ब्रह्मांड का दर्शन हुआ, जिससे उन्हें विश्वास हो गया कि उनका पुत्र पूर्ण ब्रह्म स्वरूप है।
कथा में ब्रह्मा द्वारा गायों और बछड़ों का अपहरण करने तथा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा सभी को पुनः उसी रूप में प्रकट कर देने का प्रसंग भी सुनाया गया। इसके बाद गोवर्धन पूजा का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान कृष्ण ने इंद्र पूजा की परंपरा समाप्त कर गोवर्धन पर्वत की पूजा का संदेश दिया। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने भारी वर्षा कर दी, तब भगवान ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर गोकुलवासियों की रक्षा की।
कथा में आगे नंद बाबा के वरुण लोक जाने तथा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उन्हें वापस लाने का प्रसंग सुनाया गया। इसके साथ ही शरद पूर्णिमा की रासलीला का सुंदर वर्णन किया गया, जिसमें श्रीकृष्ण की मुरली की धुन सुनकर गोपियां यमुना तट पर पहुंच गईं।
इस अवसर पर रामदुलारे त्रिगुनायत ने अयोध्या कांड का प्रसंग सुनाया, जबकि पीलीभीत से आए शिवकुमार सुमन ने बाली वध और सुग्रीव राज्याभिषेक की कथा का वर्णन किया। कार्यक्रम का संचालन आचार्य रामानंद दीक्षित ने किया। इस दौरान विठूर से पधारी साध्वी रमा मिश्रा और व्यास अवधेश दीक्षित की भी विशेष उपस्थिति रही।
कथा क्रम में मुख्य यजमान कमलेश कुमार खन्ना ने व्यास पीठ और अन्य विद्वानों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस अवसर पर ध्रुव नारायण मेहरा, सुधा मेहरा, सोमनाथ कपूर, सरिता कपूर, जयप्रकाश खन्ना, चंद्रशेखर खन्ना (धीरू खन्ना), रोली खन्ना, रागिनी खन्ना, डॉ. राम मेहरोत्रा सहित अनेक भक्तों ने सहयोग दिया।
अंत में आरती और प्रसाद वितरण के साथ कथा को विश्राम दिया गया।








