लखनऊ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने जहां जीवन को आसान और तेज़ बनाया है, वहीं इसके बढ़ते उपयोग से पानी का एक नया और गंभीर संकट सामने आ रहा है। AI को संचालित करने वाले बड़े डेटा सेंटर्स में सर्वरों को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की खपत होती है, जिसकी कीमत प्रकृति चुका रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे जल-संकटग्रस्त देश में यदि AI का विस्तार बिना जल संरक्षण और ग्रीन टेक्नोलॉजी के हुआ, तो भविष्य में हालात और गंभीर हो सकते हैं। समाधान के तौर पर वॉटर-एफिशिएंट डेटा सेंटर्स, रिसाइकल्ड या समुद्री पानी का उपयोग, पारदर्शी जल-खपत नीति और जिम्मेदार AI इस्तेमाल पर ज़ोर दिया जा रहा है। विकास तभी टिकाऊ होगा, जब तकनीक और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे।
AI ने जीवन आसान किया, लेकिन बढ़ा पानी का संकट: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की छुपी हुई कीमत
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