सिकंदरा, कानपुर देहात।
कस्बे में स्थित हज़रत मीर सैय्यद हुसैन अली (र.ह.) की दरगाह पर शेर-ए-खुदा हज़रत अली (रज़ि.) की यौमे विलादत (जन्मदिवस) अकीदत और खुलूस के साथ मनाई गई। इस अवसर पर फातिहा, कुरान ख़्वानी और मुल्क में अमन-चैन व खुशहाली के लिए विशेष दुआएं की गईं। साथ ही अकीदतमंदों के लिए लंगर का भी एहतमाम किया गया।
शनिवार को दरगाह परिसर में खलीफ़ा-ए-हुज़ूर अहमद-ए-मिल्लत हाफिज़ सैय्यद इमाम मियां कादरी बरकाती की निगरानी में कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस दौरान इस्लाम धर्म के चौथे खलीफ़ा और पहले इमाम हज़रत अली शेर-ए-खुदा की यौमे पैदाइश को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार रजब माह की 13 तारीख को हज़रत अली का जन्म हुआ था।
मौलानाओं ने अपने संबोधन में हज़रत अली (अ.स.) के जीवन और शिक्षाओं पर विस्तार से रोशनी डाली। शायरों ने उनके शान में कलाम पेश किए। वक्ताओं ने कहा कि इस्लाम को घर-घर तक पहुंचाने में मौला अली का योगदान अतुलनीय है।








