Shahjahanpur | Liberal Media
वाराणसी/शाहजहांपुर। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े एक मामले में नया मोड़ सामने आया है। श्रीविद्या मठ, केदारघाट में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान शाहजहांपुर निवासी पत्रकार रमाशंकर दीक्षित ने दावा किया कि हिस्ट्रीशीटर बताए जा रहे आशुतोष पांडेय ने उन्हें आर्थिक प्रलोभन देकर शंकराचार्य पर झूठा आरोप लगाने के लिए उकसाया था। पत्रकार रमाशंकर दीक्षित ने शाहजहांपुर में लिबरल मीडिया से बातचीत के दौरान भी वही आरोप दोहराए थे।
शाहजहांपुर के पत्रकार रमाशंकर दीक्षित ने हालिया विवादित प्रकरण को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उन्हें एक व्यक्ति द्वारा आर्थिक प्रलोभन देकर एक प्रतिष्ठित धार्मिक संत पर झूठा आरोप लगाने के लिए उकसाया गया था।
उन्होंने दावा किया कि आशुतोष पांडेय द्वारा उन्हें आर्थिक प्रलोभन देकर ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर झूठा यौन शोषण का आरोप लगाने के लिए कहा गया था। रमाशंकर दीक्षित ने कहा कि उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और इसे अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध बताया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रस्ताव अस्वीकार करने के बाद उन्हें धमकी दी गई। दीक्षित के अनुसार, उन्होंने इस पूरे प्रकरण को लिखित रूप में संबंधित पक्ष को सौंप दिया है।
हालांकि, इन आरोपों को लेकर आशुतोष पांडेय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
रमाशंकर दीक्षित ने वाराणसी में पत्रकारों के समक्ष कहा कि उन्हें फोन के माध्यम से यह प्रस्ताव दिया गया कि वे शंकराचार्य पर बद्रीनाथ में एक नाबालिग बच्ची के साथ यौन शोषण का आरोप लगाएं, जिसके बदले आर्थिक सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्ताव ठुकराने पर उन्हें धमकी भी दी गई।
दीक्षित ने बताया कि उनके पिता दंडी संन्यासी रहे हैं और इसी कारण वे किसी संत को झूठे मामले में फंसाने के लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्होंने अपनी बात लिखित रूप में हस्ताक्षर सहित शंकराचार्य को सौंप दी है।
उक्त आरोपों को लेकर आशुतोष पांडेय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रकरण को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हैं। आगे की स्थिति संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और संभावित जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगी।








