नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के PSLV-C62 मिशन के असफल होने के बाद देश के अहम जासूसी सैटेलाइट समेत कुल 16 सैटेलाइट अंतरिक्ष में निष्क्रिय हो गए। मिशन फेल होने के साथ ही ये सभी सैटेलाइट निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं हो सके और नियंत्रण से बाहर हो गए।
विशेषज्ञों के अनुसार, खराब या पुराने हो चुके सैटेलाइट्स को निपटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो प्रमुख तरीके अपनाए जाते हैं। लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में मौजूद छोटे सैटेलाइट्स आमतौर पर पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय हवा के घर्षण से 5 से 25 वर्षों के भीतर खुद ही नष्ट हो जाते हैं। वहीं, बड़े और संवेदनशील सैटेलाइट्स को नियंत्रित तरीके से पृथ्वी की ओर गिराया जाता है, ताकि किसी भी तरह के नुकसान की आशंका न रहे।
PSLV-C62 मिशन की असफलता को लेकर ISRO द्वारा तकनीकी कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि भविष्य के मिशनों में ऐसी त्रुटियों से बचने के लिए सभी पहलुओं की गहन समीक्षा की जाएगी। इस घटना को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक बड़ा सबक











